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Wednesday, July 1, 2020

सीमाओं में कहाँ बँधा है

सीमाओं में कहाँ बँधा है

सीमाओं में कहाँ बँधा है
प्रतिभाओं का तार
गगन के जाना जिनको पार
गगन के जाना जिनको पार

लिये हाथ में श्रम की लाठी
रच लेते ये नव परिपाटी
सपने आसमान के लेकिन
पाँव तले रहती है माटी
अपनी कूवत से कर लेते
सात समंदर पार
गगन के ...........

चाँद तोड़ अमृत निचोड़ लें
बरसाती जलधार मोड़ दें
टूटे हुए शिकारे कश्ती
जब चाहे ये उन्हें जोड़ दें
पाँव  वक्त के सिर पर
रखने को हर दम तैयार
गगन के ...........

ये संघर्षों का प्रतिफल है
महाउदधि में मीठा जल है
नैराश्यों के बियावान में
एकमात्र ये ही सम्बल हैं
ये प्रलयी अंधड के आगे
भरते हैं हुंकार
गगन के ...........

-सोनम यादव

Tuesday, June 30, 2020

हाइकु कविताएँ

हाइकु


-01-

सपना बुना
अहिंसा पुजारी ने
सत्य ही चुना

-सोनम यादव



-02-

मनीप्लांट पे
करती है बसेरा
भोली चिड़िया

-सोनम यादव


-03-
गुस्सा करती
फुदकती गौरैया
आ जाती घर 

-सोनम यादव



-04-
जाने क्या लेने
आ जाती थी गौरैया
घर भीतर

-सोनम यादव


-05-
 किसे रिझाता
पंखों में चाँद बाँधे 
जंगली मोर 

-सोनम यादव


-06-
गेहूं के दाने
घूरती घूम घूम
नन्हीं चिड़िया

-सोनम यादव


-07-
गली मोहल्ले
उग आये सन्नाटे 
बोये किसने 

-सोनम यादव


-08-
आँख घुमाती
रगड़ लेती चोंच
दाना चुगती

-सोनम यादव


-09-
बया करता
नयी कशीदाकारी
ले आता बहू

-सोनम यादव